अपने दुख दर्द परेशानी को छुपाना चाहता हूं,
मन ही मन रोते हुए मुस्कुराना चाहता हूं ।
मानता हूं तुझसे दूर रहना मजबूरी है मेरी,
पर मैं भी तो अपनी सांसो में तुझे बसाना चाहता हूं ।
मम्मी पापा की खुशियों में खुद को भूल जाना चाहता हूं,
हंसती हुई भीड़ में तो ना खो सका,
पर तेरी खुशबू में तेरी यादों में डूब जाना चाहता हूं।।
इन हसीन वादियों से पुराना रिश्ता सा लगता है,
चाहता हूं तुझे बुलाना यहां,पर दुश्मन की हरकत से डर लगता है ।
वैसे तो यह वादियां किसी दुल्हन से कम नहीं, पर आजकल इन्हें सफेद कफन सी चादर ने ढक रखा है ।
अपनों से कटा बटा सबसे अलग खड़ा होना चाहता हूं,
अकेला चलता आया हूं अपना वजन खुद ही ढोना चाहता हूं।।
अकेलेपन के सन्नाटे को निगल कर, तेरे रंग में रंग जाना चाहता हूं,,
चेहरे पर मुस्कुराहट चिपकाकर तेरी खुशबू में खो जाना चाहता हूं।।
मन ही मन रोते हुए मुस्कुराना चाहता हूं ।
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